साथ बीती कभी हस्ती , कभी कश्ती हमारी थे सवारते पतवार एक दूजे की। मोहब्बत के उस सैलाव ने, एक झटके में दोस्ती की नांव डुबो डाली।। __ सोनम
Get link
Facebook
X
Pinterest
Email
Other Apps
चाहत थी ....
Get link
Facebook
X
Pinterest
Email
Other Apps
-
इवादत ........
तुझे देख अपना बना, लेने की चाहत थी | पास ना होकर , फिर भी एक आहट थी || तेरी बहती खुशबु मे, घुल जाने की तमन्ना थी | तेरी रूह में समा जाती , यही तो मेरे इश्क की इवादत थी ||
Umda....👌
ReplyDelete